हमारे बारे में: श्री मंगलनाथ मंदिर, उज्जैन
परिचय एवं हमारा संकल्प
उज्जैन में शिप्रा के तट पर स्थित श्री मंगलनाथ मंदिर धार्मिक आस्था का स्थल है। स्थानीय धार्मिक मान्यता में इसे मंगल देव की जन्मस्थली माना जाता है।
हम श्रद्धालुओं को मंगल भात पूजा और ग्रह शांति अनुष्ठान की जानकारी व व्यवस्था में सहायता करते हैं। पूजा की विधि, सामग्री और व्यक्तिगत संकल्प के लिए पंडित जी से पहले परामर्श करें। अनुष्ठान सुख-शांति और परिवार के कल्याण की कामना से किए जाते हैं।
मंगलनाथ मंदिर का पौराणिक इतिहास
स्कंद पुराण के अवंतिका खंड तथा मत्स्य पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, प्राचीन काल में अंधकासुर नामक दैत्य ने अपने अत्याचारों से तीनों लोकों में त्राहि-त्राहि मचा दी थी। उस समय भगवान शिव और अंधकासुर के बीच भीषण युद्ध हुआ।
युद्ध के दौरान देवाधिदेव महादेव के ललाट से पसीने की एक बूंद इस पवित्र भूमि पर गिरी। उस तेजपुंज बूंद के स्पर्श से पृथ्वी दो भागों में विभक्त हुई और वहां से रक्ताभ वर्ण वाले अंगारक (मंगल देव) का प्राकट्य हुआ। पृथ्वी से उत्पन्न होने के कारण मंगल देव को ‘भौम’ (भूमि-पुत्र) भी कहा जाता है। भगवान शिव ने स्वयं यहां मंगल देव को प्रतिष्ठित किया, जिन्हें आज मंगलनाथ महादेव के रूप में पूजा जाता है।
इस पावन स्थान का भौगोलिक एवं ज्योतिषीय महत्व
धार्मिक महत्व: मंगलनाथ मंदिर उज्जैन की धार्मिक परंपरा में मंगल देव की पूजा से जुड़ा स्थान है।
ज्योतिषीय मान्यता: श्रद्धालु मंगल शांति और परिवार के कल्याण की कामना से यहां पूजा कराते हैं।
व्यक्तिगत परामर्श: कुंडली और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा की जरूरत व विधि पंडित जी से तय करें।
मंगलनाथ मंदिर में संपन्न होने वाले प्रमुख वैदिक अनुष्ठान
1. मंगल दोष शांति एवं भात पूजा
धार्मिक आस्था के अनुसार भात पूजा मंगल देव की शांति और परिवार के कल्याण की कामना से की जाती है। इसमें शिवलिंग पर भात अर्पित कर पूजन किया जाता है।
2. अंगारक दोष शांति पूजा
ज्योतिषीय परंपरा में मंगल और राहु या केतु की युति को अंगारक योग कहा जाता है। कुंडली के अनुसार पंडित जी से परामर्श लेकर मंत्र जाप और हवन की विधि तय की जाती है।
3. अर्क विवाह एवं कुंभ विवाह
कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में मांगलिक कुंडली के लिए अर्क वृक्ष अथवा कुंभ के साथ प्रतीकात्मक विवाह का विधान है। इसकी जरूरत और विधि व्यक्तिगत परामर्श से तय करें।
4. कालसर्प दोष शांति पूजा
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार राहु-केतु के बीच ग्रहों की स्थिति को कालसर्प योग कहा जाता है। श्रद्धालु राहु-केतु की शांति और सुख-शांति की कामना से नाग पूजन, अभिषेक तथा मंत्र जाप कराते हैं।
5. नवग्रह शांति एवं महामृत्युंजय जाप
धार्मिक आस्था के अनुसार परिवार के कल्याण और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से नवग्रह पूजन, हवन और महामृत्युंजय मंत्र जाप कराया जाता है। अनुष्ठान की विधि और जाप संख्या पंडित जी से पहले तय करें।
हमारे साथ पूजा संपन्न कराने की विशेषताएं
वैदिक परंपरा: पूजा की विधि और पूजन के चरण पंडित जी से पहले समझें।
व्यक्तिगत संकल्प: यजमान के नाम, गोत्र, कुंडली परामर्श और पारिवारिक संकल्प के अनुसार पूजा की व्यवस्था तय करें।
पूजन सामग्री: चुने हुए अनुष्ठान में भात, पंचामृत और अन्य पूजन सामग्री की व्यवस्था तथा स्वयं लाने वाली वस्तुओं की जानकारी पहले लें।
प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन अनुष्ठान: उज्जैन न आ पाने पर ऑनलाइन पूजा वीडियो कॉल पर संपन्न करवाई जा सकती है। पूजा का समय और संकल्प पहले तय करें।
संपर्क एवं पूजा अग्रिम बुकिंग
जन्मपत्रिका परामर्श और पूजा व्यवस्था की जानकारी के लिए संपर्क करें:
स्थान: श्री मंगलनाथ महादेव मंदिर परिसर, मंगलनाथ मार्ग, उज्जैन, मध्य प्रदेश – 456001
हेल्पलाइन / व्हाट्सएप: +91 9131822037
सेवाएं: मंगल भात पूजा, अंगारक योग, कालसर्प शांति, अर्क/कुंभ विवाह एवं वैदिक संस्कार